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As of February 17, 2025, the price of a 14.2 kg domestic LPG cylinder in India varies by city:
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- Delhi: ₹803.00
- Mumbai: ₹802.50
- Kolkata: ₹829.00
- Chennai: ₹818.50
These prices have remained unchanged since August 1, 2024. citeturn0search8
For commercial consumers, the price of a 19 kg LPG cylinder has seen a slight reduction. Effective February 1, 2025, the prices are:
- Delhi: ₹1,797.00
- Mumbai: ₹1,749.00
- Kolkata: ₹1,908.00
- Chennai: ₹1,968.50
This reduction of ₹7 per cylinder aims to benefit businesses, especially in the hospitality sector. citeturn0search2
In Bhopal, Madhya Pradesh, LPG prices are generally aligned with national trends. While specific prices for Bhopal aren’t detailed in the provided sources, they typically reflect the pricing in major cities like Delhi and Mumbai.
Looking ahead, the global LPG market is expected to experience changes. Slowing supply growth could provide upward support to prices in 2025. Additionally, OPEC+ policies and their decisions on crude output will play a significant role in determining LPG production and pricing. citeturn0search5
For the most accurate and current LPG prices in Bhopal, it’s advisable to consult local suppliers or official government notifications, as prices can vary based on regional taxes and transportation costs.
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लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) घरेलू, औद्योगिक और परिवहन क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है। इसके मूल्य में उतार-चढ़ाव विभिन्न कारकों, जैसे कि कच्चे तेल की कीमतें, सरकारी नीतियां और आपूर्ति श्रृंखला की गतिशीलता के कारण होते हैं। इस विश्लेषण में एलपीजी के मूल्य प्रवृत्तियों, मूल्य निर्धारण को प्रभावित करने वाले कारकों और भविष्य की भविष्यवाणियों की जांच की गई है।
एलपीजी मूल्य निर्धारण में ऐतिहासिक प्रवृत्तियाँ
एलपीजी की कीमतें ऐतिहासिक रूप से कच्चे तेल की प्रवृत्तियों का अनुसरण करती हैं, क्योंकि यह तेल शोधन और प्राकृतिक गैस प्रसंस्करण का एक उप-उत्पाद है। पिछले दशक में कई महत्वपूर्ण प्रवृत्तियाँ देखी गई हैं:
- 2010-2014: वैश्विक मांग में वृद्धि और तेल उत्पादक क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कीमतें अपेक्षाकृत उच्च रहीं।
- 2015-2017: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका में बढ़े हुए उत्पादन के कारण कीमतों में कमी आई।
- 2018-2019: नियंत्रित उत्पादन और उभरते बाजारों में बढ़ती मांग के कारण कीमतें स्थिर हो गईं।
- 2020-2021: कोविड-19 के कारण मांग में तेज गिरावट आई, जिससे कीमतों में गिरावट आई, लेकिन 2021 में अर्थव्यवस्थाओं के खुलने के साथ कीमतें वापस बढ़ गईं।
- 2022-2025: रूस-यूक्रेन संघर्ष, मुद्रास्फीति और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों ने एलपीजी मूल्य निर्धारण को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है, जिससे अस्थिरता बढ़ी है।
एलपीजी कीमतों को प्रभावित करने वाले कारक
एलपीजी मूल्य निर्धारण को प्रभावित करने वाले कई प्रमुख कारक हैं:
1. कच्चे तेल की कीमतें
- एलपीजी कच्चे तेल की कीमतों से निकटता से जुड़ा हुआ है; जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो एलपीजी की कीमतें भी बढ़ती हैं।
- आपूर्ति में व्यवधान (जैसे, ओपेक+ के निर्णय, संघर्ष) कीमतों को प्रभावित करते हैं।
2. आपूर्ति और मांग की गतिशीलता
- एशिया और अफ्रीका में बढ़ती मांग वैश्विक कीमतों को प्रभावित करती है।
- मौसमी विविधताएँ (सर्दियों में अधिक मांग) मूल्य निर्धारण को प्रभावित करती हैं।
3. सरकारी नीतियाँ और सब्सिडी
- कई देश एलपीजी की कीमतों को सब्सिडी के माध्यम से नियंत्रित करते हैं।
- सब्सिडी हटाने से कीमतों में वृद्धि होती है, जिससे उपभोक्ताओं पर प्रभाव पड़ता है।
4. वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियाँ
- व्यापार प्रतिबंध और आर्थिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करते हैं।
- मुद्रास्फीति और मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव घरेलू एलपीजी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
5. परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत
- भंडारण, शिपिंग और वितरण से संबंधित लागतें अंतिम उपभोक्ता कीमतों को प्रभावित करती हैं।
- आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान (जैसे, बंदरगाह भीड़, श्रमिकों की कमी) मूल्य वृद्धि का कारण बनते हैं।
क्षेत्रीय एलपीजी मूल्य प्रवृत्तियाँ
एलपीजी मूल्य निर्धारण वैश्विक स्तर पर भिन्न होता है, विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रवृत्तियाँ देखी जाती हैं:
1. एशिया-प्रशांत
- चीन और भारत प्रमुख उपभोक्ता हैं, जहां सरकारी नीतियाँ मूल्य निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- खाना पकाने और उद्योगों में एलपीजी की बढ़ती मांग कीमतों को प्रभावित करती है।
2. यूरोप
- ऊर्जा संकट और रूस से आयात पर निर्भरता के कारण मूल्य अस्थिरता देखी गई है।
- हरित ऊर्जा नीतियाँ दीर्घकालिक एलपीजी मांग को प्रभावित करती हैं।
3. उत्तर अमेरिका
- अमेरिका में शेल गैस उत्पादन ने एलपीजी कीमतों को अपेक्षाकृत स्थिर रखा है।
- एशिया और यूरोप को निर्यात की प्रवृत्तियाँ घरेलू मूल्य निर्धारण को प्रभावित करती हैं।
4. मध्य पूर्व और अफ्रीका
- मध्य पूर्वी देशों को कम उत्पादन लागत का लाभ मिलता है, जिससे घरेलू कीमतें कम रहती हैं।
- अफ्रीकी देशों को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे शिपिंग और बुनियादी ढाँचा संबंधी सीमाओं के कारण उच्च कीमतें होती हैं।
एलपीजी कीमतों की भविष्यवाणियाँ
विशेषज्ञ निम्नलिखित प्रवृत्तियों की भविष्यवाणी करते हैं:
- अल्पकालिक अस्थिरता
- भू-राजनीतिक घटनाएँ और आर्थिक नीतियाँ उतार-चढ़ाव का कारण बनती रहेंगी।
- मौसमी मांग विविधताओं से कीमतों पर प्रभाव पड़ेगा।
- हरित ऊर्जा एकीकरण के साथ दीर्घकालिक स्थिरता
- उत्पादन दक्षता में वृद्धि और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से कीमतों में स्थिरता आ सकती है।
- सरकारें निम्न-आय वाले परिवारों का समर्थन करने के लिए मूल्य विनियमन जारी रख सकती हैं।
- तकनीकी नवाचारों का प्रभाव
- भंडारण, परिवहन और उत्पादन में प्रगति से लागतें कम हो सकती हैं।
- बायोएलपीजी का विकास स्थायी और स्थिर विकल्प प्रदान कर सकता है।
निष्कर्ष
एलपीजी की कीमतें वैश्विक आर्थिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय कारकों के जटिल मिश्रण से प्रभावित होती हैं। इन गतिशीलताओं को समझना नीति निर्माताओं, व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है। जबकि अल्पकालिक मूल्य उतार-चढ़ाव अपेक्षित हैं, दीर्घकालिक स्थिरता तकनीकी प्रगति और नियामक उपायों के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है/